कवनो सगुना उचारिं रउआ पतरा में
हमर पियावा भुला गइलें छपरा में
आस रहे नथुनी के भेजनी बजरवा,
भूल भईल एतने कि रहनी ना पंजरवा,
हम त सेतीहे में पड़ गइनी लफड़ा में।
लिखीं ना दरोगा जी एगो रिपोट जी,
अबला के क दीं ना तनिका सपोट जी,
तनिका जोहिं ना बाड़ें पिया खतरा में।
नान्हें बलम के उमर लड़कइयाँ,
देवता पितर गोहराईं गोसइयाँ,
बाड़ें अमित बलमुआ अफतरा में।
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