केकरा से मिलके आवत बाड़ू दिलजानी हो, छोड़ $ मनमानी हो।
ए जान कवनो मन में ससपीसन ना चाहीं
तोहरा माई बाबू केहू के परमिशन ना चाहीं।

नान्हें उमर से लागल तोहरे आस हो
काहे नाही करत बाड़ू हमर बिसवास हो
बेरी बेरी हमरा रीभीजन ना चाहीं।

तोहरी सुरतिया ना बिसरे धेयान से
तोहरा के रोजे माँगिले भगवान से
तिलक दहेज के पोजीसन ना चाहीं।

बबुआ बीरेंदर के हाथ लागी जहिया
छूट जाई सखियन के साथ गोरी तहिया
अमित से कवनो रिलेशन ना चाहीं।

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